उम्मीद


By Sumit Singh (L&T MHPS)

उम्मीद खुद से ज्यादा दूसरों से कम रक्खो

ये उड़ान तुम्हारी है,अपने पंखो पे यकीं रक्खो

 

इस प्यासी पड़ी जमीन को सदियों से प्यास है

सब हम ही से चाहते हो, खुद भी तो दम रक्खो

 

मैं इश्क़ में सौदेबाज़ी नहीं करता खातून-ऐ–क़यामत1

सुनो ऐसा करो तुम अपने नखरे अपने पास ही रक्खो

 

वादा सभी कर लेते है उम्र भर साथ निभाने का

राह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा में  दो गाम2 तो संग रक्खो

 

यारों संग अय्याशी में लाखों उड़ा दिए होंगे उसने

कभी कभार,रुपए दो चार फ़क़ीर के हाथ भी रक्खो

 

मूड अगर बन ही गया है पत्थर पिघलाने का “सुमित”

भूल जा फलसफे विज्ञान के, बस नल-नील3 याद रक्खो

  1. Khaatuun-e-qayaamat: Lady of dooms day
  2. Gaam: Footsteps
  3. Nala-Neel: Builder of theRama Setu, a bridge across the ocean built by floating stones

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sumit singh

Thank you All

Sunil S

Sumit we never knew the writer in you. Acha likha hai aapne. Keep it up.

subhadeep

great!! keep it up brother..

KSR Madhuri

Nice one Sumit…