परवाना


By Rajesh Dhiman, LMB

मेरी फितरत है कि गुस्ताखी बार बार करता हूँ |

हसर मालूम है लेकिन मोहब्बत बेशुमार करता हूँ |

 

तू आदत बदले तो मैं मिज़ाज़ क्यों बदलूँ,

तू (साड़ी चल)1 कहाँ सड़ने से इंकार करता हूँ |

 

तेरा फूक देना मेरा फुक जाना इत्तफाक नहीं,

मेरे इश्क़ का सलीका है, जो इज़हार करता हूँ |

 

तेरे बिना जीना क्या जीना और मुझे क्या करना,

दो पल तेरे साथ जियूं जान निसार करता हूँ |

 

तेरे सीने लग जल जाने का है मजा बड़ा,

बस मैं जानू या रब जाने कैसे प्यार करता हूँ |

 

मेरा इश्क़ कैद नहीं हो सकता इन हदों मैं,

मैं आरधीमान राज सोचूँ, बस पार करता हूँ |

(साड़ी चल)1– जलाना

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Mukesh

awesome…👏👏👏👏

Joggi Singh

Ultimate….

Ravindra Soni

Bahut badhia Rajesh Bhai…

sunny

मस्त लिखा है भाई।। दिल खुश हो जाता है । तेरा लिखा हुआ पड़ कर।।

Manish mishra

बहुत खूब लिखा। बधाइयां एवं शुभकामनाएं।

Ravi Shankar

Nice Rajesh, .. Great.. keep it up…….

Parul

Vadiya…..

Akhil

Nice…

Sandeep Dahiya

Very well written.. Keep writing…