फ़रेबी हूँ


By: Anjali Punia, Sister of Ashish Kumar (LMB)

क्या हूँ मैं और क्या  हो जाना चाहती हूँ
इसी कश्मकश  में उलझी क्या सुलझाती हूँ

है बर्फ या के सर्द हवा जम गई
पानी है या बर्फ को ज़माने की लू लग गई
लू हवा है गर्म या पानी उड़ चला कहीं
दिखती हूँ मैं जो , मैं हूँ भी या मैं नहीं

छलावों से भरे हैं सबके दामन
मैं भी अपना तिलिस्म दिखाती हूँ

फ़रेबी  हूँ  , हँसी  को ओढ़ लेती हूँ
नमक गालों पर पोत लेती हूँ
मेरी नज़र में भोला है दुनिया का हर धोखा
नज़र फेर लेती हूँ हर धोखे की नज़र से मैं

चेहरे कई साथ रखती हूँ
ज़रूरत मुताबिक़ लगाती हूँ

क्या हूँ और क्या हो जाना चाहती हूँ
इसी कश्मकश में उलझी क्या सुलझाती हूँ