एहसास

By Aditya Singh (L&T-MHPS Boilers)

जिसकी दुआ की वो कभी पाया नहीं

और जो माँगा नहीं वो मिलता गया

पता था कि इतनी आसान न होगी

पर सांस आती रही और मैं गिनता रहा

किसने कहा कि बहुत फ़ीका है जीवन

मैं तो दुःख न होने की ख़ुशी ही मनाता गया

कहाँ कहा किसी से कि तन्हा हूँ मैं

पर लोग मिलते रहे और काफ़िला बनाता गया

मंज़िल की तो नहीं हैं खबर मुझे

पर मोड़ आते रहे और रास्ता बनता गया

कुछ पल ऑंखें जो बंद होती थी

तो चुपके से अधूरा ख्वाब पूरा होता गया

न किया किसी ने भी पूरा सफ़र मेरे संग

पर ख़ुशी है कि कुछ पल वो साथ निभाता गया

ठोकर खाने पे गिरता रहा गुरुर मेरा

मैं तो उठ के फिर से चलता गया

बहुत सन्नाटा है शायद इस जीवन में

पर धुन बजती रही और मैं गीत गता चला गया

जिसकी दुआ की वो कभी पाया नहीं

और जो माँगा नहीं वो मिलता गया

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Dhawal

Awesome!!

Ananya

Beautifully written Aditya! Keep up the good work!