आरही


By Archit Gupta (L&T Railways)

अपने नाम में उसका नाम लगा चुके हैं

हम अपनी ज़िन्दगी उसके लिए गवां चुके हैं

लम्हा-लम्हा सांसो के साथ प्यार बढ़ता रहता है

हम अपनी हर सांस को उसके लिए लुटा चुके हैं


उसका रुलाना भी कमाल लगता है

उसका रूठना एक सवाल लगता है

जब ये लगा कि मैं कितना प्यार करता हूँ

मेरा प्यार मुझे बेमिसाल लगता है


इतना हो गया पर भरोसा है कि वो साथ देगी

मुझे उठाने के लिए मुझे अपना हाथ देगी

वो मेरी ‘हीर’ है, इस प्रेम की कहानी में

उसे वापस लाने में मेरा साथ कायनात देगी

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satyajeet panda

very nice sir

Archit Gupta

Thank you everyone for the Appreciation

Nipendra Shil

finally published

Deepak Dubey

waah…. bahut kaas.

Tushar Vasantrao Khade

Poet has given a poetic justice while expressing the feeling towards a loved one.

Manu Chaudhary

Very Nice Mr. Archit Gupta