“SAHIIRI”

Piyush Raj Sinha, PT&D-IC

“कुछ पंक्तियां ज़िन्दगी के वजूद को हौसला ओर प्रेरणा दे जाती हैं।”

हार कर सब कुछ जीने का जज़्बा सीख लिया,
हारना तो मौत से है,मैंने जिंदगी जीना सीख लिया।
कई बाज़ी हारा हूँ, अभी कई बाज़ी जीतूंगा भी,
सहना अब जिंदगी का हर वार सीख लिया।
दुःखों का क्या है आनी-जानी चीज है,
सफर में धूप है तो छाँव ढूंढना सीख लिया।
खो कर रास्ते बार-बार, नई मंज़िल पर निकल लेता हूँ,
पल-दो-पल की ख़ुशी को पूरी जिंदगी बनाना सीख लिया।
खुशियों से ज्यादा तो गम मिल जाते है अक्सर,
वक्त बुरा है या हम ये समझाना सीख लिया।
कवि “राज़” यूँ तो भरी है ज़िंदगी जख्मों से,
भूल कर सब कुछ वक्त को मरहम बनाना सीख लिया।

मैंने जिंदगी जीना सीख लिया।

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Aditya

Baakhubi likha hua!!!👌