सिर्फ मै

By-ADITYA SINGH (L&T MHPS)

मैं जिया हूँ झूठी शान से ,

मैंने कहाँ किसी को मारा है?

किसने कहा  कि मैं खुदा नहीं,

मुझे कुदरत का सहारा है ?

मैंने तेज़ रफ़्तार से चलाई है गाड़ी,

भले ही उसके धुएं ने सांसे मेरी धीमी की ।

किसने कहा कि मोबाइल की बढ़ती पहुंच से ,

मैंने संदेशवाहक चिड़याओं को मारा है?

ऊँचे ऊँचे पेड़ काटे है मैंने ,

पर अपनी सड़कें ना छोटी होने दी ।

किसने कहा कि मेरे कमरे के ए.सी. से ,

गरम हो रहा बाहर का पारा है ?

मेरे चमड़े के शौक से ज़्यादा महंगी,

तो किसी जानवर की जान नहीं  ।

किसने कहा कि अपने कचड़े के ढेर से, 

मुझे नदी और समुद्र का मरना गंवारा है ?

मैं जिया हूँ झूठी शान से ,

मैंने खुद को ही तो मारा है  ।

किसने कहा कि मैं खुदा नहीं,

मुझे कुदरत का सहारा है?

ADIOS…

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