मिडल क्लास ज़िन्दगी

By Sandeep Dahiya (L&T-MHPS)

हर तरफ शोर मचा है राय देने का और लेने का

कोई हमारी भी राय शामिल करो रायशुमारी में


एक को सैलरी आयी दो को पुरानी उधारी चुकाई

अगले अठाइस दिन फिर निकल गए उधारी में


चार दिन की ज़िन्दगी थी जिया ही नहीं मैं

जवानी ज़िम्मेदारियों में गई बुढ़ापा बीमारी में


इन ग़मों की माला बना , दोनों पहनेंगे

फिर मैं भी खुमारी में और तू भी खुमारी में


ये सब चोर पहले से ही जमानत लिए बैठे हैं

ये दिखावा है, कुछ नहीं रखा इनकी गिरफ़्तारी में


आज़ाद हैं की कैद हैं ये पता ही नहीं चलता

आज़ादी है ही नहीं आज़ादी हमारी में


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