दिल की कलम से

By Abhishek Mishra (Railways SBG )

परेशानी जरूर है ,मगर परेशान नहीं हूँ  मै.

दोस्तों से जरा कह दो ,अभी पंहुचा नहीं हूँ मै….

मुझे बांध नहीं पायेगी ,परेशानी की जंजीरे

दोस्तों से जरा कह दो ,अभी थका नहीं हूँ  मै.

सब्र का बांध टूटेगा तो,फ़ना कर के रख दूंगा.

अपनों से जरा कह दो, अभी बिखरा नहीं हूँ  मै.

दिल में छुपा रखी हैं ,पुराने दिनों की चाहते

दोस्तों से जरा कह दो,अभी बदला नहीं हूँ  मै.

मेरे साथ चलता हैं, दुआओ का काफिला

दोस्तों से कह दो अभी टूटा नहीं हूँ  मै.

Leave a Reply

  Subscribe  
Notify of