मुश्किल सफ़र में

by Sandeep Dahiya (L&T-MHPS Boilers)

मैं अच्छा हूँ मगर बेहतर हो सकता हूँ 

मैं दरिया हूँ मगर समन्दर हो सकता हूँ 


मेरे चेहरे को मत देख मेरी रूह में झांक 

बहुत खूबसूरत मैं मेरे अंदर हो सकता हूँ 


दुनिया के हिसाब से कुछ नहीं हूँ मैं,मगर 

अपनी तकदीर का सिकन्दर हो सकता हूँ 


कहाँ मुझे यहाँ वहाँ ढूंडता रहता है तू 

ध्यान से देख मैं तेरे अंदर हो सकता हूँ 


मुझे देख के अनदेखा करने वाले सुन 

मैं दुआ कुबुल होने वाला दर हो सकता हूँ 


इतनी नफरत से मुझे क्यूँ देखता है 

किसी मोहब्बत का मैं घर हो सकता हूँ 


मुझे मंजीलें नहीं मिली तजुर्बा तो मिला है

मुश्किल सफ़र में हमसफ़र हो सकता हूँ 


मुझे सहेज कर अपनी पलकों पे बिठा ले

मैं तेरे ख्वाबों का हसीं मंज़र हो सकता हूँ 


ये तेरी महफ़िल तेरी बड़ी ही कायल है मगर

चाहूं तो मैं इसका लफ्त-ए -जिगर हो सकता हूँ


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