उस्से पहले ज़िंदगी को जीना है …


By Somesh Shah (LTSL)

 

ये वक़्त बहुत ही इठलाता है ..

सारी ऊँची नीची दिखलाता है …

पूछो ग़र की क्यों हमें इतना सताता है …

तो इस ज़िंदगी का मोल बतलाता है …

ख़ुशी और ग़म तो आएंगे ही ..

साथ में यादें लाएंगे ही ..

ज़िंदगी तो है बस नाम चलते रहने का …

डर के आगे जीत दर्ज करते रहने का …

चलोगे दौड़ोगे तो गिरोगे भी …

ये शर्त है , ऐसा होगा ही …

किसने देखा है सूरज उगते हुए …

वो ही बता सकता है जो रात भर सोया ही नहीं….

आज की परीक्षा , हमारा कल सुधारेगा

यही चिंतन हम किया करते हैं …

डूब जाते हैं ,

और सिर्फ़ जिया करते हैं …

ज़िंदगी सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं है

कड़वा फल , करेला या , जला हुआ शीरा नहीं है …

न है ये टूटी सड़कें , बेहिसाब गंदगी…

और न ही है सिर्फ़ झूठी बंदगी …

इसे चैन से देखना है …

मानो फूलों का एक बगीचा है …

खुशबू वाला एक किनारा है …

समंदर की लहरों से विशाल सवेरा है …

इन सब चीज़ों को हमें महसूस करना है …

समय के साथ बस ऐसे ही चलना है …

कब क्या हो जाए हमें- तुम्हे …

उस्से पहले…इस ज़िंदगी को जीना है …