Sangeen Bayan-e-Taj!!


By: Saif Sayed (LT MHPS)

 

क्यूँ महेलो मैं गिना जाता है इसे

कोई मुग़ल का कबरस्तान भर ही तो हैं

 

मरमर मैं रंगीन फूल बिखेरे गाए है याहा

कहा देखा की कफ़न मैं रंग भरे जाते हैं

 

होने दो इसे भी ख़ाक जैसे कोई मिट्टी की क़ब्र

क्यूँ मरम्मत से इसकी ख़ैर की जा रही हैं

 

नादान था शाह जहाँ जो ये महेल बनाया

लोग पत्थरों मैं अब प्यार ढूंढते हैं

 

वापसी में मूड के ना देखा जएगा इसे

मेरे तसव्वुर में इस्से कुछ ज़िना है

 

मना रहा हु ख़ुद को इसके ख़िलाफ़

हर पल ताज ने मज़े बद-एहवाल दिखाया है