शराब की बोतल


By Prem Prakash Akhauri (L&T MHPS)

बूत की तरह हो मगर लाजवाब हो
बेजान होते हुए भी खूब असरदार हो

दिल चाहता है की तेरी पूजा करूं
नजरों से कभी रूखसत ना करूं

कोई घमंड या चाहत नहीं तुम में
खाली होकर मिजाज़ पर छा जाते हो

टूटे हुए दिल का मलहम हो तुम
फूटे हुए नसीबों का सहारा हो तुम

महफिल तेरे बिना सजती नहीं
बज़म तेरे बिना जंचती नहीं

गरीबों को दो घूठ में गर्मी देते हो
अमीरों को बर्फिली मजा़ देते हो

इन्सानों में याराना पैदा करते हो
जो ईज्जत ना करे जहर बन जाते हो

सोमरस देवताओं को भी पसंद आते हो
असत्य का कभी साथ नहीं देते हो

इतने गुणों होते भी बदनामी पाते हो ..पीपीए

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