Diary of a GET- Part 3


By Kirti Vardhan (NSBU, HCIC, WDFCC –  CTP 3R Project, Mehsana, Gujarat)

[Disclaimer: इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं। कहानी में उपयोग हुए सभी पात्र, स्थान, L&T प्रबंधन के सभी पात्र – उनके हिरार्की और परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में किसी घटना से संबंध होता है तो इसे महज संयोग हीं माना जायेगा। इस कहानी श्रृंखला का उद्देश्य केवल मनोरंजन है, जिससे लेखक सामान्य तौर पे एक GET के शुरुआती दिनों की याद ताजा कराने की कोशिश मात्र कर रहा है।]


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घर से सूदूर नौकरी पर जाना हमेशा मन को बोझिल कर देता है। कमल भी अपनी अल्प अवकाश के बाद गृह स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हुआ। बक्सर से ट्रेन छूटते समय, पिताजी की आँखें सजल हो उठी थीं, ऐसे क्षण कमल ने बहुत कम देखे थे… शायद एक-आध बार हीं….अपनी दीदी के शादी के बाद विदाई के समय।

प्राचीन काल से हीं भारतवर्ष एंटरप्रेन्योरस मने कि उद्यम संबधी और स्वरोजगार का देश रहा है। ऐसा क्या हुआ हमारी शिक्षा पद्धति और सामाजिक परिवर्तन में कि अप्रतिम शिक्षा, डिग्री और मेहनत के बाद भी अब भारत के बेटे नौकरी करते हैं…. अपने घर, खलिहान और माँ – पिता से बरस में एक – दो बार मेहमान की तरह दीवाली, दशहरा और ईद में हीं मिलने जाते हैं। फिर माँ-बाप की वर्षों की तपस्या का परिणय सिर्फ बच्चे के सुदूर नौकरी करने तक हीं सीमित हो जाती है? यद्यपि कमल को यह संतोष था कि वह एक ऐसी कंपनी में है जो राष्ट्र निर्माण में निरंतर तत्पर है, और जिसे कलाम साहब ने “साल्ट ऑफ इंडिया” की उपाधि से नवाजा है।…. इन्हीं ख्यालों में डूबे हुए कब ट्रेन आगे निकल गयी, पता न चला। चाय वाले ने कमल का ध्यान तोड़ा, मुग़लसराय जंक्शन पे…. “ट्रेन की खिड़की से… मालिक डिप टी नहीं है, खांटी दूध की देसी अदरक वाली चाय है, पीने के बाद पैसे देना”… कमल ने चाय ली और चुस्की लेते हुए महसूस हुआ, वाकई डिप टी से बेहतर है। लेकिन घर जैसी तो नहीं…

अगली सुबह ट्रेन नई दिल्ली दो घंटे देरी से पहुँची। कमल ने सुबह ही HOD पाण्डे साब को और दीपक सर को मैसेज कर दिया था कि ट्रेन थोड़ी लेट है औऱ वो ऑफिस करीब 10बजे तक पहुँचेगा। दिल्ली से बस की बजाय कमल ने ऑटो लेना उचित समझा, बदरपुर पर ट्रैफिक का ध्यान रखते हुए। जल्दी- जल्दी रिक्सा लेकर रूम पे बैग पटका और फ्रेश होने के बाद घर से लाये पेड़े लेकर ऑफिस निकल गया।

अपनी सीट पर ऑफिस बैग और मिठाई का डब्बा रखकर सीधा पांडे सर के केबिन में….. कोई खास मीटिंग चल रही थी। दीपक सर ने कमल को बगल वाली कुर्सी पर बैठने का इशारा किया और वक्तव्य दिया “कमल ये सप्ताह बहुत हेक्टिक है, तुम्हें गुरुवार को राजस्थान में मारवाड़ के पास साइट विजिट पे जाना पड़ेगा। ये प्रोजेक्ट की सलिएन्ट फीचर्स और डिटेल्स हैं। पढ़ लो फिर बात करेंगे।” कमल दोनों सीनियर्स को ग्रीट करके केबिन से बाहर आ गया।

फोन पॉकेट से बाहर निकाला तो देखा माँ- पिताजी के कई मिस कॉल पड़े हुए थे। तभी माँ का फिर से कॉल आया।

माँ- कहाँ है बेटे, फोन भी नहीं उठाता? ऑफिस पहुँच गया? आज थका होगा, छुट्टी ले के आराम कर ले।… और हाँ, डेंगू, मलेरिया की बहुत खबरें आ रही हैं दिल्ली से। पिताजी ने होमियोपैथ की पृकाशनरी दवाई तेरे बैग में ऊपर वाले पॉकेट में डाल दी है….. दवा का नाम है “यूपोटोरिअम पेरफोलि”… हफ्ते में एकाध बार खुद भी खा लेना और दोस्तों को भी खिला देना। और हाँ, खाना खाया???

कमल – माँ……. मैं ऑफिस में हूँ। सब ठीक है। शाम को बात करूंगा।

कमल को खतरनाक भूख लगी थी। राहुल के टेबल के पास जा के उसको पेड़ा खिलाया और आज लंच प्रीपोन करने की गुजारिश की। आस पास के लोगों को भी मिठाई आफर करने के बाद जब कमल सीट पे लौट रहा था तो रास्ते में ऋचा मिली… दोनों की नजरें मिलीं…. किसी अदृश्य शक्ति ने दोनों के कदमों को विराम लगा दिया। असहज लहजे में कमल ने मिठाई का अधखुला डिब्बा ऋचा की तरफ ऑफर किया… पेड़ा उठाते हुए ऋचा ने पूछा …”क्या खुशखबरी है?” ……..

प्रत्युत्तर – बस ऐसे हीं, घर गया था, माँ ने दोस्तों के लिए बना के दिये हैं”…

“ऋचा – कमल नाम है आपका, टेंडरिंग में हैं? मैं ऋचा, आपके दोस्त राहुल के साथ डिज़ाइन में हूँ”….

कमल – हाँ, मालूम है। राहुल से कभी-कभी बात होती है।

ऋचा – सी यू… फिर मिलते हैं।….

इस पहली संक्षिप्त मुलाकात के बाद लौटते कदमों से लंच के लिए जाते बखत कमल को लगा जैसे वो जन्नत के बहुत करीब है….. वर्क स्टेशन के बाजू में रखे ग्रीन प्लांट्स झूम रहे हैं। सारे कंप्यूटर और CPUs में से उसे संगीत की तान सुनाई दी। वो सोचने लगा…

“ये हक़ीक़त है के होता है असर बातों में…

तुम भी खुल जाओगे दो-चार मुलाक़ातों में….” #1

कमल लंच से आने के बाद नए प्रोजेक्ट के विवरण अध्ययन में खो गया। जब उसने साइट विजिट से सम्बंधित पूरे नोट्स बना लिये तो शाम हो चली थी। कमल दीपक सर के पास गया डिस्कशन के लिए…  थोड़ा बहुत मौखिक वार्तालाप के बाद दीपक सर ने अगली सुबह विस्तृत विवरण के लिए प्रस्ताव किया। कमल ने मान लिया, क्योंकि रात्रि ट्रेन यात्रा और दिन भर काम के बाद बहुत थका हुआ था। सिस्टम शट डाउन करने से पहले कमल ने मेल चेक किया … कई मेल्स में से थी एक सूचना मेल…. कंपनी के एनुअल कल्चरल फंक्शन के बारे में ……, जो कि 14 नवंबर को दीवाली के बाद आयोजित होनी है। उसी की तैयारियों के विषय में जानकारी दी गयी थी। वालंटियर्स के नाम देखकर कमल के चेहरे पे सुकून भरी मुस्कान अनवरस तैर गयी। कमल के डिपार्टमेंट से उसका खुद का नाम था, लेकिन डिज़ाइन से ऋचा का नाम वोलुण्टीएर लिस्ट में देखकर वो जाने क्यों खुशी से झूम उठा।

कमल कई बार सोचता था कि ऋचा से और बातचीत की जाय। आज पहली बातचीत हुई थी, और अब एनुअल फंक्शन की तैयारियों के दौरान उसे ऋचा से बात करने का मौका बार बार मिलेगा।… शट डाउन के बाद वो रूम की तरफ निकल गया। लिफ़्ट के सामने रूममेट राहुल को देखकर दोनों ने हल्की मुस्कान से एक दूसरे का अभिनंदन किया। … रूम पहुँचने से पहले रास्ते में कमल ने राहुल को नुक्कड़ पे चाय के लिए रुकने का प्रस्ताव दिया। राहुल को थोड़ा आश्चर्य हुआ, सामान्यतः कमल को रूम पे हीं चाय पीना पसंद है।

राहुल- का हुआ बे? घर पे सब ठीक तो है? कोई खास बात?

कमल – हाँ एक जरूरी बात करनी है। तुमसे कहने की हिम्मत नहीं हो रही।

राहुल- एक रहपट दूँगा। कौन सी बात है बे जो मेरे से नहीं कह सकता? 7 बरस से ऊपर की दोस्ती हो गयी। पहली बार सुन रहा हूँ ऐसी बात।

कमल – यार, ऐसी बात नहीं है। तेरे पे भरोसा है, इसलिए तुझसे कह रहा हूँ। यार … अ.. म  म  म.. मुझे…. “अबे मुझे इश्क हो रहा है बे”… कहूँ कैसे?

राहुल – कौन है तेरे गाँव से है?

कमल – नहीं। अपने ऑफीस में है…. “ऋचा” ..

राहुल – मरेगा तू बेटा…. प्रोफेशन और मोहब्बत को दूर रखना चाहिए। भाई टाइम पास करने के लिए तो नहीं कर रहा। पूरे 4 साल कॉलेज में तो तुझे कभी नहीं देखा इन चक्करों में पड़ते हुए?

कमल – सही है यार। अब मुझे क्या पता था, इश्क ऑफिस में हीं होगा। यार शादी करनी है उससे। पहले ऋचा को मनाना है फिर दोनों के घर वालों को। कैसे प्रोपोज करूँ?

राहुल – वो महेंद्र कपूर का गाना नहीं सुना …

“सुना है हर जवां पत्थर के दिल में आग होती है, मगर जब तक ना छेड़ो, शर्म भी परदे में सोती है।

ये सोचा है कि दिल की बात उसके रूबरू कह दे, नतीजा कुछ भी निकले, आज अपनी आरजू कह दे।

हर एक बेजां तकल्लुफ से बगावत का इरादा है।

किसी पत्थर की मूरत से बगावत का इरादा है।…”

 

राहुल कहने लगा कमल से… सोचता क्या है, प्रपोज कर दे। … लेकिन एक बात का ध्यान रखना भाई… “ना ” सुनने का हड़का होना चाहिए जिगर में। और प्रोपोज इतना शालीन हो कि “ना” के बाद भी एक – दूसरे से मिलो तो इज्जत से मिलो।

दोनों मित्र रूम की तरफ निकलते हैं। रात को खाने के बाद कमल सोचने लगा कि प्रोपोज कैसे किया जाय।

“अपनी आँखों के समन्दर में उतर जाने दे,

तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब कर मर जाने दे” #2

 

या फिर जंजीर के अमिताभ की तरह …

“तुमसे आज मैं वो कहना चाहता हूँ, जो लाखों – करोड़ों बार इस दुनिया में दुहरायी गयी होंगी…. लेकिन मैं तुमसे पहली बार कहना चाहता हूँ….”

या फिर, क्रन्तिकारी फ़िल्म हासिल के इरफान खान की तरह, नायिका के बालों से रिबन निकालकर उसे बम बनाके प्यार का इजहार करें… । इसी सोच में कब कमल को नींद आ गयी, मालूम नहीं चला।

सुबह ऑफिस में कमल की कई लम्बी मीटिंग चली दीपक सर और पांडे साब के साथ। हेक्टिक शेड्यूल में यह भी डिसकस हुआ साइट विजिट में क्या डेटा कलेक्ट करना है। क्लाइंट ऑफिस में किस से मिलना है… इत्यादि… शाम को ऑफिस ऑवर के बाद एनुअल फंक्शन के लिए पहली मीटिंग थी…. सारे वोलुण्टीएर इकट्ठे हुए, विस्तृत योजनाएँ बनने लगीं कि ऑफिस वर्क्स को बिना प्रभावित किये हुए कैसे फंक्शन की तैयारियों के लिए समय देकर इसे सफल बनाया जाय। पूरे प्रांगण में एक्टर्स, मिमिकर्स, डांसर्स, म्यूजिशियन सभी की खोज और उनके लिए प्रैक्टिस की योजनाएं बनने लगीं। मैक्सिमम पार्टिसिपेशन को तवज्जो दिया गया, क्योंकि यह कोई प्रतियोगिता नहीं है। यह वर्क- लाइफ बैलेंस के लिए एक टॉनिक है।… ऋचा को डांसर्स की खोज और उनकी प्रैक्टिस की जिम्मेवारी दी गयी। कमल को सभी विधाओं के बीच ओवरऑल शेड्यूल कोऑर्डिनेशन और मिमिक्री पार्टिसिपेंट्स की जिम्मेवारी दी गयी।

मीटिंग के बाद कमल बाहर निकलते हुए ऋचा के साथ बातें करते हुए चहल कदमी करने लगा। कहाँ रहती हो/ साथ मे कौन रहता है? … कहाँ की रहने वाली हो? घर मे और कौन हैं? इत्यादि सामान्य बातें…

कमल को अब लगने लगा कि ऋचा भी उससे बात-चीत में सहज रहती है। लेकिन थोड़ा और समय देकर उसने साइट विजिट के बाद प्रोपोज करने की सोची।

कमल गुरुवार को विजिट पे निकल गया। रिमोट में स्थित सारे जरूरी डेटा, रुट प्लान, एक्सेस फ़ॉर हैवी मशीनरी एन्ड इक्विपमेंट, नियरेस्ट रेल नेटवर्क, महत्वपूर्ण फोटोज इत्यादि के बाद क्लाइंट ऑफिस निकल गया। यह कमल की पहली PR मीटिंग थी। वो तसल्ली और सावधानी से मिला सभी क्लाइंट ऑफिशियल्स के साथ। …….दो दिनों की विजिट के बाद वापस लौटकर रिपोर्ट पांडे साब को सबमिट किया। पांडे साब ने कमल को इस टेन्डर का लीड लेने के लिए बोला।

शनिवार की शाम वोलुण्टीएर की मीटिंग के बाद कमल ऋचा की तरफ मुखातिब हुआ.. “ऋचा कुछ बात करनी है आपसे” ..

ऋचा – हाँ बोलिये कमल।

बहुत देर तक सन्नाटा… कमल के हलक से सांस तक पास नहीं हो रही थी। कमल नजरें तक नहीं मिला पा रहा था ऋचा से। एक अपराधी के सदृश खड़ा था वो…

ऋचा – हाँ बोलिये, मैं सुन रही हूँ… डांसर्स के शेड्यूल से संबंधित कुछ बात करनी है?

कमल ने पूरी हिम्मत से लड़खड़ाते हुए बोला – आई….. मैं…..

ऋचा – जल्दी बोलो…

अब ऋचा एम्ब्रेसिंग फील कर रही थी। तभी कमल ने अपनी आँखें बंद करके पूरी ताकत लगा के आवाज निकाली…

कमल – मैंने तुम्हारे लिए हिंदी की कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं….

 

“तेरे होंठों की हँसी बन जाने का ख्वाब है, तेरी आगोश में सीमट जाने का ख्वाब है।

तू लाख बचा ले दामन इश्क के हाँथो, आसमां बन कर तुझ पर छा जाने का ख्वाब है।

 

…… अब ऋचा थोड़ी सकपकाई हुई सी कमल को घूर रही थी, लेकिन कमल ने अपनी पंक्तियों की लड़ियाँ जारी रखीं…

“आजमाइश यूँ तो अच्छी नहीं होती इश्क में, तू चाहे तो तेरी तकदीर बनाने का ख्वाब है।…..”

अब कमल बड़ी उत्सुकता से ऋचा से नजरें मिला पा रहा था। और न जाने उसे एक शक्ति मिल पा रही थी अपनी बात पूरी करने की… और अंतिम छंद…

“जी भी लेंगे, अगर जीना पड़ा तेरे बिना, लेकिन तुझ पर मर-मिटने का ख्वाब है।”

कमल कह रहा था ऋचा से – मुझे तुम्हारा हर प्रत्युत्तर स्वीकार्य है। लेकिन मुझे जानने, समझने और सोचने के बाद हीं अपना जवाब देना।

ऋचा अब एक क्षण भी रुकी नहीं वहाँ… वो तेज कदमों से थोड़ी असहज और अशांत निकल गयी अपने रूम की तरफ, थोड़ी रुआँसी होती हुई…..

कमल को खुशी तो थी अपनी हिम्मत पे लेकिन अब शायद “ना” सुनने की ताकत नहीं थी। और उसे ऐसा भी महसूस हो रहा था, कहीं ऋचा के पावन-पवित्र मन को उसने चोट तो नहीं पहुँचायी?….

आज शनिवार की शाम भी थी, इजहार-ए-इश्क की शाम भी थी… कमल थोड़ा भयभीत तो जरूर था लेकिन आशान्वित भी था…. इन्हीं ख़यालों में वो रूम पहुँच गया…. अपने कमरे में जाकर पूरा इजहारे इश्क राहुल को सुनाया…  राहुल ने ध्यान से सुनने के बाद – तूने ठीक हीं किया, लेकिन थोड़ा और आपसी समझ के बाद इजहार अच्छा होता… खैर अब इंतजार कर जवाब का और कोई हस्तक्षेप नहीं… और आज तो पार्टी होनी चाहिए….

…….रूम पे हीं सेलिब्रेशन स्टार्ट होता है पांचों रूममेट्स के साथ, लेकिन मर्यादा में ….और इजहार की सूचना गुप्त रखी जाती है दोनों मित्रों के बीच… पार्टी शुरू होने के थोड़ी देर बाद राहुल ने कमल के कंधे पे हाँथ रख के कुछ शायरी शुरू की…

राहुल – “ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा,

वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा” #3

 

कमल ने प्रत्युत्तर दिया

“कुछ अंधेरों ने सूरज को चुनौती दी है,

हौसला रखिये हम सूरज है जुगनू नही।” #4

 

राहुल का पलटवार इस महफ़िल में…

“जिनको दर्द मिल गया उनको शायरी आ गयी..

जिनको दर्द रह गया, उनको पैगम्बरी आ गयी…”#5

 

कमल तो इश्क में डूबा था, उसने महफ़िल में एक और तोप दागा…

“बड़ी अजीब है ये मोहब्बत…

वरना अभी मेरी उम्र ही क्या थी शायरी करने की…” #6

 

तभी बाकी 3 फ्लैटमेट्स ने महफ़िल-ए-आनंद के बीच दोनों शायर बंधुओं को चेताया … भाई! रात के दो बजे गए हैं… अब खाना खा के सोएं?…

 

 

राहुल ने आज की महफ़िल-ए-सप्ताहांत की अंतिम पंखुड़ियों से सभा समाप्त की घोषणा की…

“वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था कि रात बीत गई….

अभी तो रंग जमा था कि रात बीत गई…..”#7

 

सभी मित्र सो जाते हैं खाना खा के। रविवार देर से उठने के बाद कमल को किसी मेसेज, किसी जादू की उम्मीद थी। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। ….. अगले दिन सोमवार को ऑफिस में वर्कलोड बहुत था। लंच के समय वो ऋचा के डिपार्टमेंट में गया… राहुल ने बताया आज ऋचा ऑफिस नहीं आयी है। कमल थोड़ा उदास हो गया … मंगलवार को भी ऋचा ऑफीस नहीं आयी… बुद्धवार सुबह-सुबह हीं कमल राहुल के पास गया, आज भी ऋचा नहीं आयी थी…..वही दिन दुपहर में राहुल दौड़ता हुआ कमल के पास आया और बताया कि ऋचा को रविवार को बहुत बुखार आया था और उसे डेंगू डिटेक्ट हुआ है। अभी वह ठीक है और एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में एडमिट है।…

कमल बिना किसी को कुछ बताये ऑफिस से हॉस्पिटल के लिए भागा…. वहाँ पहुँचने पर ऋचा की दोस्त और रूममेट एंट्रेंस पर मिली…. उसने बताया कि अब ऋचा ठीक है, आज उसे डिस्चार्ज कर देंगे। ऊपर के कमरे में जाकर मिल लो…. सहमा कमल बताये हुए रूम की तरफ भागा…. एंटर करते हीं सामने ऋचा लेटी थी और शायद बगल में उसकी माँ बैठी थीं…. कमल और राहुल ने माँ को नमस्ते किया…. ऋचा ने आँखे खोली… कमल से नजरें मिलीं फिर ऋचा ने करवट लेके नजरें फेर लीं।

कमल का दिल रुआँसा हो गया…..राहुल भी इस तकलीफ को समझ पा रहा था।

राहुल ने ऋचा से पूछा “अब कैसी तबियत है?” प्रत्युत्तर में केवल nod के लिए थोड़ा सा चेहरा हिला ऋचा का…

….उसकी माँ ने बताया, परसों बहुत तकलीफ थी। आज टेस्ट हुए हैं, सब नार्मल है। लेकिन वीकनेस तो रहेगी अभी…

कमल वापस ऑफीस लौट आया। काम करने में पूरे हफ्ते उसका मन नहीं लगा। एनुअल फंक्शन की तैयारियों में भी वो बेमन से जाता था। राहुल ने बताया ऋचा लीव पे घर चली गयी है करीब 10 दिनों के लिए।

……सप्ताहांत में शनिवार की शाम वो राहुल के साथ था, और उसके मुख से बस इतना हीं निकल पाया….

 

“इतने जाम पीकर भी मैं होश में रहता हूँ,

बस यही शिकायत है मुझे मयखानों से।” #8

 

राहुल ने उसे समझाया…

 

“इश्क तो कर लिया है तुमने मेरी जां

मगर ये आसां न होगा

 

दर्द ए दिल मयस्सर होगा इसमें इतना

कि तुमसे बयां न होगा #9

 

राहुल बताने लगा कमल को भाई! ईश्वर पे भरोसा रख….. ऋचा को वापस तो आने दे घर से। उसकी “हाँ” भी स्वीकार… और अगर तूने सच्ची मोहब्बत की है तो उसकी “ना” भी सर आँखों पर…

लेकिन कमल ने किसी घनघोर आवारा बादल की तरह इश्क की गहराइयों के परे प्रत्युत्तर दिया…

 

“खुदा का ज़िक्र ना कर हम उदास लोगों से

हम मुफ़लिस हैं लोगों से आस रखते हैं”#10

 

बारह दिनों बाद ऋचा ने वापस ऑफिस जॉइन की। शरीर से ज्यादा वो मन से दुःखी लग रही थी….कहीं नहीं जाती, सिर्फ अपनी सीट पे बैठकर ही पूरा दिन निकाल देती…..राहुल से उसका हाय-हैल्लो होता रहता था। लेकिन राहुल ने सब जानते हुए भी चुप रहना बेहतर समझा और ईश्वर पे छोड़ दिया इस परिस्थिति को।

राहुल केवल कमल को प्रेरित करता रहता। अपने काम मे और एनुअल फंक्शन की तैयारी में ध्यान लगा के बिजी रहने की सलाह देता। ऋचा के बारे में बिना पूछे ही राहुल जब हाल- ख्याल बताता तो कमल के दिल से अभी भी यही आशावादी आवाज आती…

“सुना है हमें वो भुलाने लगे हैं,

तो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं”#11

 

फिर एनुअल फंक्शन से कुछ दिनों पहले शाम को ऑफिस खत्म होते समय दुर्घटनावस कमल की मुलाकात ऋचा से लिफ्ट के सामने हुई…… कमल ने हिम्मत करके उसका नाम पुकारा – ऋचा……

प्रत्युत्तर में ऋचा – मुझसे बात मत करना प्लीज।…

लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर पर पहुँचने के बाद .. ऋचा तेज कदमों से चली गयी… कमल को तो लगा जैसे सब कुछ उजड़ गया हो…. ये सामने एंट्रेंस का फव्वारा जैसे रो रहा हो….. ऑफिस प्राँगण के सारे पेड़ पौधे जैसे हलक से सूख गए हों…..

कमल रूम पहुँच के नहाकर बिना खाये सोने चले गया। राहुल कहीं बाहर गया था। …..शाम को अब ठंढ ने दस्तक दे दी है….. हल्की ठंढ़ हवा से कमल के मन में यही खयाल आ रहा था…

 

“दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया

जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया

इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बर्बाद

इसका गम है कि बहुत देर में बर्बाद किया…”#12

 

रात भर सो न सका कमल। …..अगली सुबह उसने न जाने कहाँ से सब कुछ भूल जाने का आत्मबल सुनिश्चित किया…. सुबह उठकर माँ को फोन करके कुशल क्षेम – आशीर्वाद लिया…. और केवल काम का ध्यान करके ऑफिस की ओर निकल गया।

……..पूरे दिन काम करने के बाद परसों होने वाले फंक्शन के लिए गेट पास वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई। कमल ने भी अपना पास रखकर, उसको खुद को वोलुण्टीएर की शेड्यूल की जिम्मेवारी को अंतिम रूप देने में एनुअल फंक्शन टीम के साथ व्यस्त हो गया।

एनुअल डे के दिन सुबह से हीं विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं चल रही थीं। पूरे प्रांगण में उत्सव सा माहौल था। लगभग सभी एम्प्लॉई और उनके परिवार के लोग शिरकत कर रहे थे। कमल भी विभिन्न जिम्मेदारियां पूरी तत्परता से निभा रहा था।  बीच बीच मे कुछ एक खेलकूद में भी भाग ले रहा था। …. सुबह से शुरू हुए खेलकूद अब दुपहर में खत्म होने के कगार पे आ गए…. पुरस्कार/ मैडल वितरण के बाद धीरे धीरे सभी एम्प्लॉई और परिवारगण रिलैक्स होने और तैयार होने के लिए अपने घरों को निकल गए।

शाम को मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होना है। ….लेकिन वोलुण्टीएर को चैन नहीं है, बहुत काम हैं। कमल भी पूरी तन्मयता से तैयारियों में लगा हुआ है।

शाम साढ़े छह बजे कमल भी ड्रेस चेंज करने रूम चला गया……तैयार होकर आया तो सबसे पहले प्रोग्राम के लिए बच्चे तैयार थे। कमल ने फाइनल शेड्यूल एंकर को पकड़ा दिया… और एक कोने में बैठकर प्रोग्राम देखने लगा…..एक से बढ़कर एक टैलेंट….. कई मौकों पर लगा बॉलीवुड भी फेल है। म्यूजिकल टीम की परफॉर्मेंस के बाद कई नाटक – नुक्कड़, मिमिक्री इत्यादि कार्यक्रम हुए…..लास्ट में डांस के बेजोड़ कार्यक्रम हुए।…. उसी में से ऋचा भी एक अंतिम नारी- शक्ति प्रोग्राम में सम्मिलित हुई है। कमल का दिल … उसे देखकर थोड़ी देर के लिए सशंकित जरूर हुआ ….लेकिन वो संभल के फिर से कार्यक्रम में बिजी हो गया। गेस्ट संबोधन और वोट ऑफ थैंक्स से पहले एंथम से कार्यक्रम की समाप्ति हुई।

कमल डिनर के लिए दोस्तों को ढूंढ़ने लगा। राहुल और ऋचा उसे एक साथ दिखाई दिये डिनर पंडाल की तरफ जाते हुए। कमल को देखकर राहुल उसकी तरफ आया और दोनों ने साथ मे डिनर किया। …..DJ पर थोड़ा नाच गाने के बाद दोनों दोस्त करीब 12बजे रात में रूम की तरफ चल दिये।

तभी राहुल ने ऑफिस प्रांगण में स्थित एटीएम के बाहर कमल को रुकने के लिए बोलकर पैसे निकालने चला गया…… बाहर हीं इंतजार करते हुए कमल को आयोजन स्थल की तरफ से ऋचा ने पुकारा –  “कमल! कैसे हैं आप?”

कमल हतप्रध रह गया….

ऋचा बोल रही थी “ऐसे एकदम से किसी लडक़ी को थोड़े ही प्रपोज किया जाता है….. थोड़ा अपने बारे में बताओ…..थोड़ा उसके बारे में जानो। ….फिर इश्क- मोहब्बत की बात करो। ….और देखो अपना थोबड़ा… कैसे आशिक की तरह घूम रहे हो। ….आपको समझना पड़ेगा एक लड़की की बहुत सीमाएं होती हैं… माँ-पिता, समाज और फिर कौन कैसा है?….. एकदम से कोई हाँ, ना कैसे कह सकता है।….

ऋचा कहती जा रही है…. अब उसके बातों में अपनत्व का भाव आ गया है… मेरी हाँ का मतलब हाँ है, फिर पूरा जीवन हाँ है….। मेरी हाँ के बाद तुम्हारे घर वालों ने मना कर दिया अपनाने से तो? क्या करोगे? फिर से आशिक की तरह घूमना शुरू कर दोगे? …..

तब तक राहुल आ गया….। ऋचा अभी भी बोल रही है.. जाओ अपने घर में हमारी शादी के लिए बात करो…..। सबको मनाओ… मुझे तुम्हारा प्रस्ताव मंजूर है….

तीनों चुप …….. कमल वहीं जड़ हो गया …… ऋचा कमल के पास आई, उसका हाँथ पकड़ के शालीनता से बोली ….. आई …..आई ….

राहुल दूर हट गया …… दोनों के प्यार से भरी रोने- सिसकने की आवाज राहुल के कानों पे पड़ी…. वह अपने दोस्त की मोहब्बत को मुकम्मल होने के लिए पिछले दस दिनों में अपने द्वारा किये गए प्रयासों से खुश था…. जिन प्रयासों के बारे में कमल कुछ नहीं जानता था…

(क्रमशः…..)


Ref.: ( #1सईद राही), (#२गजल- मेंहदी हसन), (#3अज़हर लखनवी), (#4अज्ञात), (#5अज्ञात) , (#6अज्ञात), (#7तैमूर हसन), (#8संदीप दहिया, मैं और ये जिंदगी), (#9संदीप दहिया, मैं और ये जिंदगी), (#10अज्ञात),  (#11खुमार बाराबंकवी), (#12 गजल मेंहदी हसन)


 

 

4 thoughts on “Diary of a GET- Part 3

  1. Kirti bhai………….it is very irritating to reach the end and wait for a month again to know ‘what happened next’.

    Your narration is so mesmerizing that I wish the story never ends……

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