शिकवे


By: Rajesh Dhiman (L&T MHPS)

शिकवे शिकायतों को भूलाके तो देखता ||

बोलते जरूर तू बुलाके तो देखता ||

 

मांग लेते माफ़ीया दोनों हाथ जोड़के,

जाते जाते नज़रे घुमाके तो देखता ||

 

तेरे बिना और मेरे कौन नजदीक था,

हउमै वाला परदा उठाके तो देखता ||

 

तेरे साथ बैठके बराबर ही बांटते,

कभी हमें दर्द सुना के तो देखता ||

 

देखते है राह तेरी दरवाज़े खोलके,

देते सत्कार तू आके तो देखता ||

 

ऐसी भी “धीमान राज” कैसी नाराज़गी,

मानते जरूर तू मनाके तो देखता ||

 

हउमै – अहंकार,

23 thoughts on “शिकवे

  1. बहुत ही खूबसूरत !!

    और कमाल की बात ये रही कि सिर्फ एक ही लव्ज़ के मायने मुझे नही पता थे ,और धीमान साहब को ये बात पता थी।।।

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