भरम

By: Rajesh Dhiman (LMB)

 

आशिक तेरा इश्क़ तेरे में ठरता है कोई।

आज भी तुझपे पहले जैसे मरता है कोई।

 

जीतने वाले लोगो में एक तेरी गिनती है,

हारने वालों में तेरा भी हरता है कोई।

 

दूर दूर से तकता रहा ना नज़र मिला पाया,

नज़र मिलाके नज़र चुराने से डरता है कोई।

 

तेरे रस्ते के काँटों की तुझे बिलकुल खबर नहीं,

तली बिछा तेरे पैरों तले जरता है कोई।

 

हस्ते चेहरे पर मातम कभी गम का ना आये,

तेरी आंख से बह्ते आंसू में खरता है कोई।

 

“धीमान राज” की शायरी कभी भाती थी तुझको,

उसी भरम में आज भी लिखा करता है कोई।

 

 

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