उसे शिकवा है

By Rajesh Dhiman ( L&T MHPS)

 

उसे शिकवा है कि मैं उस पर कोई गीत नहीं लिखता

उसे शिकवा है कि मैं उसे मेरी मीत नहीं लिखता

 

उसे शिकवा है कि मैं जब लिखता हूँ दर्द ही लिखता हूँ

उसे शिकवा है कि मैं उस संग मेरी प्रीत नहीं लिखता

 

उसे शिकवा है कि मैं बिरहा भरी इक उम्र बीताता हूँ

उसे शिकवा है कि मैं उसे मेरे नजदीक नहीं लिखता

 

उसे शिकवा है कि मैं ग़ालिब या पातर को पढ़ता हूँ

उसे शिकवा है कि मैं नए दौर की नई रीत नहीं लिखता

 

उसे शिकवा है कि मैं उसकी कोई बात नहीं लिखता

उसे शिकवा है कि मैं उस पर नीत बदनीयत नहीं लिखता

 

उसे शिकवा है कि “धीमान राज” कोई लिहाज़ नहीं लिखता

और मुझे शिकवा है कि मैं अभी बारीक़ नहीं लिखता

 

 

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