इक रोग


By Rajesh Dhiman (LMB)

इक रोग हमने लगा लिया l

इश्क़े है नाम धरा लिया l

फिर ढूंढा अपने पीर को,

पर अपना आप गवा लिया l

मीरा के जैसी तड़प है,

बुल्ले के जैसे सता लिया l

नैनो को आस फरीद सी,

कौओ को भी समझा लिया l

और चाह ना कोई चाहिए,

उसे चाह लिया तो चाह लिया l

अब नहीं गुज़ारा उस बिना,

उसे इस कदर अपना लिया l

“धीमान राज” तो बे-लिहाज था,

उंगली पकड़ राह पा लिया l

12 thoughts on “इक रोग

  1. वाह धीमान साहब पंजाबी के बाद हिंदी और उर्दू शब्दो का इस्तेमाल बेहतरीन है ।। शानदार ।

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