माँ


By:  Naqeeb Alam (LMB)

वो रूठे तो क्यों ना उसे  मनालू

क्यों ना अपने बाहो में बसा  लू

मेरे दिल में हर पल एक मलाल रहता है

न जाने उसी का हमेशा क्यों ख्याल रहता है

हाँ शायद पता है मुझे

हाँ शायद पता है मुझे

 

में रूठ जाऊ तो वो मुझे मनाती है

अपने आँचल में मुझे हमेशा छिपाती है

मुझे डांटती भी है

कुछ गलत  करू तो रोकती भी है

मुझसे बात किए बिना वो रह नहीं पाती

में न खाऊ तो वो भी नहीं खाती

जानता हु एक दिन वो मुझसे दूर चली जाएगी

खुदा क़सम कहता हु बहुत याद आएगी

उसको  देख  कर  मुझे  एक  अजीब  सी खुशी आती  है

शायद  इसलिए  मुझे  वो देख कर  मुस्कुराती  है

ज़िन्दगी  में  बहुत  सारी  मेरी  खता  है

में  जानता  हु  उसको  सब  पता  है

उसको  अपने  लिए  करते  हुए  मेने  काम  देखा  है

मेरे  लिए  उसकी  आँखों  को  नाम  देखा  है

वो  मेरी  सब  कुछ  और  मेरी  हसरत  है

उसे  मुझसे  बेशक  खूब  मोहब्बत  है

वो  न  मिले  घर  में  तो  पसीने  से  तर  बा  तर  हो  जाता  हु

उसके  खोने  के  खायाल  से  या  अल्लाह  बहुत  दर  जाता  हु

उसको  अपनी  आँखों  के  सामने  काश  रोज़  देख  सकता

काश  उसको  हमेशा  अपने  पास  रख  सकता

में  उसके  लिए  उसकी  शान  हु

और  वो  मेरे   लिए  मेरी  जान  है

उसके  साथ  अपने  सरे  सपने  बुनना  चाहता  हु

उसकी  आवाज़  अपने  कानो  में  हमेशा  सुन्ना  चाहता  हु

मेरे  लिए  बेहद   दुआएं  मांगती  है वो

में  ना  आउ  तो  रातो  रात  जगती  है  वो

मेरी  एक  चीज़  उसको  इतना  असर  कर  जाती  है

मेरी  हर  छोटी  कड़वी  बात   उसके  दिल  को  लग  जाती  है

अपने  हर एक  वादों  को  उसने  मेरे  लिए  तोडा  है

अपनी  साड़ी  हसरतो  को  महज़  मेरे  लिए  छोड़ा  है

मेरी  हर  एक  कोशिश  अभी  जारी है

उसको  खुश  रखने  की  अब  मेरी  ज़िम्मेदारी  है

जितना  दर्द  उसने  सहा  है  उसका  बस  एक  हिस्सा  अब  में  सहूंगा

उसकी  सारी  खाविश  अब  पुरी  में  करूंगा

खुदा  भी  बोले  तुझे  क्या  चाहिए

में  भी   बोलूंगा  दुआओं  में  सबसे  पहले  अब  वो  चहिए

और  क्या   में  बताऊ  क्या  दिखाऊ  ये  दासातन  मेरी

में  कैसे  समझाऊ  वो  ज़िंदगी  नहीं  जहाँ  है वो मेरी

माँ है वो मेरी

माँ है वो मेरी

माँ है वो मेरी

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